"लम्हे"

कुछ खास नहीं ....
वक्त को निचोड़ती हूं मैं ...।
दो,चार लम्हे उनमें से,
फिर मैं चुरा सकूं .......।
लेखिका_मीनाक्षी शर्मा "मनस्वी"

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