"प्रभु के नाम पाती"

लिखने जब बैठूं तुमको तो, कलम ठिठक सी जाती है ।
जीवन का आधार तुम्हीं हो, हर पल यह समझाती है  ।

शब्दों में ना गढ़ पाएंगे ,  रूप तुम्हारा हे भगवन ।
भावों से ही काम चलाना ,भाव सदा तुझ पर अर्पण ।

पिया तुम्हीं ने विष का प्याला, सृष्टि की रक्षा हेतु ।
नीलकंठ तुम कहलाए, हे! महादेव जीवन सेतु ।

है अटूट विश्वास तुम्हीं पर, तुम ही पालन हारे हो ।
जीवन की दुरूह राहों से, तुम ही हमें निकाले हो ।

हे! गिरिजावर, हे! करुणाकर,सदा शरण अपनी रखना ।
देकर बुद्धि, विवेक, ज्ञान तुम, दुर्गुण से रक्षा करना ।

करते हम वंदन तुमको, तुम उसको स्वीकार करो ।
भूल चूक जो हुई हमारी, उसको तुम ना हृदय धरो ।

लेखिका_मीनाक्षी शर्मा "मनस्वी"

Comments

Popular posts from this blog

"ऐसा भी कुछ किया जाए"