"आत्म चिंतन"
बैठे जब कभी करीब अपने....... बड़ा सुकून मिला । ना थी कोई आवाजाही, ना ही विचारों का उन्माद था । थी बस नीरव सी स्तब्धता , और कुछ नीरव सा ही .... मधुर गान था । करनी थीं कुछ बातें खुद से , पर कहां इसका भी कुछ भान था । बैठे जब कभी करीब अपने...... बड़ा सुकून मिला । लेखिका _मीनाक्षी शर्मा "मनस्वी"