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"जीवन दर्शन"

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मरुस्थलों की रेत पर जब , करके हस्ताक्षर कभी ..... जागता अभिमान हो, तुम भी संभल जाना तभी । एक झोंका ही हवा का, यूं उड़ा ले जायेगा । ज्यों खुली आंखों से तुमने, स्वप्न देखा हो कोई  । लेखिका_मीनाक्षी शर्मा "मनस्वी"